यदि अधिक धन मिल भी जाय तो उससे स्त्री आदि का ही स्वार्थ-साधन होता है, तथा राजा और चोरों से भी अनर्थ की अशंका रहती है; इसलिये धन के लिये प्रयत्न करना व्यर्थ ही है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।