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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 2 • श्लोक 14
पुत्रात्सद्गतिरिति चेत्तदपि प्रायोऽस्ति युक्त्यसहम् । इत्थं शरीरकष्टैर्दुःखं सम्प्रार्थ्यते मूढैः ॥
पुत्र से सद्गति होती है - यह सर्वथा युक्ति-विरुद्ध है। (हम तो समझते हैं) इस प्रकार मूढ़ लोग शारीरिक कष्ट उठाकर दुःखों को ही मोल लेते हैं।
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