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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 2 • श्लोक 13
सर्वगुणैरुपपन्नः पुत्रः कस्यापि कुत्रचिद्भवति । सोऽल्पायू रुग्णो वा ह्यनपत्यो वा तथापि खेदाय ॥
सर्व-गुण-सम्पन्न पुत्र तो कभी कहीं किसी के होता है; वह भी यदि अल्पायु, रोगी अथवा पुत्रहीन हुआ तो दुख का ही कारण होता है।
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