मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 2 • श्लोक 12
पितृमातृबन्धुघाती मनसः खेदाय जायते पुत्रः । चिन्तयति तातनिधनं पुत्रो द्रव्याद्यधीशताहेतोः ॥
माता, पिता और बन्धुओं का घात करने वाला पुत्र सदैव उनके चित्त को दुःखित करने वाला ही होता है। वह धन एवं धरती के आधिपत्य के लिये सदा अपने पिता के मरण का ही चिन्तन करता रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें