माता, पिता और बन्धुओं का घात करने वाला पुत्र सदैव उनके चित्त को दुःखित करने वाला ही होता है। वह धन एवं धरती के आधिपत्य के लिये सदा अपने पिता के मरण का ही चिन्तन करता रहता है।
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