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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 2 • श्लोक 10
नानाशरीरकष्टैर्धनव्ययैः साध्यते पुत्रः । उत्पन्नमात्रपुत्रे जीवितचिन्ता गरीयसी तस्य ॥
नाना प्रकार के शारीरिक कष्ट और धन इत्यादि के व्यय से तो पुत्र उत्पन्न होता है और उत्पन्न होने पर भी उसके जीवित रहने की बड़ी चिन्ता लगी रहती है।
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