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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 9
त्रेधा वक्रशरीरामतिलम्बोष्ठीं स्खलद्वपुर्वचनात् । स्रक्चन्दनपरितोषात्कुब्जामृज्वाननामकरोत् ॥
तीन ओर से टेढ़े शरीर वालीं और अति लंबे-लंबे होठों वालीं कुब्जा को जिसके शरीर और वाणी प्रेमवश कम्पायमान हो रहे थे, केवल माला और चन्दन से ही सन्तुष्ट होकर, सुन्दरी सुमुखी बना दिया।
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