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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 8
वासोलोभाकलितं धावद्रजकं शिलातलैर्हत्वा । विस्मृत्य तदपराधं विकुण्ठवासोऽर्पितस्तस्मै ॥
वस्त्रों के लोभ से भागते हुए धोबी को पत्थरों से मारकर भगवान्ने उसके अपराध को भूलकर उसे बैकुण्ठ-वास दिया।
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