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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 6
पीत्वारण्यहुताशनमसह्यतत्तेजसो हेतोः । दग्धान्मुग्धानखिलाञ्जुगोप गोपान्कृपासिन्धुः ॥
जो अपने तेज के कारण अति असह्य था, बन में लगे हुए उस दावानल को पीकर उसके कारण दग्ध और मुग्ध हुए समस्त गोपों की कृपासागर भगवान्ने रक्षा की।
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