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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 4
नित्यं त्रिदशद्वेषी येन च मृत्योर्वशीकृतः केशी । काकः कोऽपि वराको बकोऽप्यशोकं गतो लोकम् ॥
उन श्रीकृष्णचन्द्र ने ही देवताओं से नित्य द्वेष करने वाले केशी का वध किया और (उन्हीं की कृपा से) बेचारे तुच्छ काकासुर और बकासुर भी शोकरहित लोकों को गये।
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