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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 29
सुतरामनन्यशरणाः क्षीराद्याहारमन्तरा यद्वत् । केवलया स्नेहदृशा कच्छपतनयाः प्रजीवन्ति ॥
जिनका कोई अन्य आश्रय नहीं है ऐसे कछुई के बच्चे जिस प्रकार दूध आदि आहार के बिना ही केवल माता की स्नेह-दृष्टि से ही पलते हैं, उसी प्रकार अनन्य भक्त भी भगवान्‌ की दया-दृष्टि के सहारे ही जीवन-निर्वाह करते हैं।
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