यद्यपि सर्वत्र समस्तथापि नृहरिस्तथाप्येते ।
भक्ताः परमानन्दे रमन्ति सदयावलोकेन ॥
यद्यपि भगवान् सर्वत्र समान हैं तथापि वे नृहरि (मनुष्यरूप हरि) भी हैं; तथा ये भक्तजन उनकी दयामयी दृष्टि से नित्य परमानन्द में मग्न रहते हैं।
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