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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 26
अयमुत्तमोऽयमधमो जात्या रूपेण सम्पदा वयसा । श्लाघ्योऽश्लाघ्यो वेत्थं न वेत्ति भगवाननुग्रहावसरे ॥
भगवान् कृपा करते समय यह नहीं देखते कि जाति, रूप, सम्पत्ति और अवस्था के विचार से अमुक पुरुष तो उत्तम है और अमुक अधम।
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