पुत्र, पौत्र, स्त्रियाँ, अन्य युवतियाँ, विभव तथा अन्य प्रकार के धन और भोज्य आदि पदार्थों में तारतम्य होने से इनमें कमी उत्कण्ठा की शान्ति नहीं होती; किन्तु अनन्त और अति गम्भीर आनन्दामृतसिन्धु श्रीयदुनायक के चित्त में उदय होकर खच्छन्द विहार करने पर ऐसा नहीं होता, क्योंकि उस समय चित्त खच्छन्द एवं निर्भय हो जाता है।
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