आप लोकाधीश स्वामी के रहते हुए आपके आश्रितों को संसारजन्य क्लेश क्यों उठाना पड़ता है? क्या सूर्यमण्डल के उदय होने पर भी कमल कभी मुरझाते हैं? यदि कहो कि संसार में मनुष्यों को अपने पूर्वकृत कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, तो मनुष्यों के मांस से पुष्ट हुए उन मेरे जाने हुए दैत्यराजों ने अवश्य आपके बल को जीत लिया था।
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