अनयत्पृथुतरशकटं निजनिकटं वा कृतापराधमपि ।
कण्ठाश्लेषविशेषादवधीद्बाल्येऽसुरं कृष्णः ॥
शकटासुर बड़ा अपराधी था तथापि भगवान् कृष्ण ने उसे अपने निकट बुला लिया (अर्थात् उसे मारकर अपना धाम दिया), और बाल्यावस्था में ही उन्होंने (तृणावर्त) असुर को गला घोंटकर मार डाला।
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