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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 17
कृपापात्रं यस्य त्रिपुररिपुरम्भोजवसतिः सुता जह्नोः पूता चरणनखनिर्णेजनजलम् । प्रदानं वा यस्य त्रिभुवनपतित्वं विभुरपि निदानं सोऽस्माकं जयति कुलदेवो यदुपतिः ॥
त्रिपुरारि शिव और कमलासन ब्रह्मा जिनकी कृपा के पात्र है, परमपावन श्रीगंगाजी जिनके चरण-नख का घोवन हैं तथा त्रिलोकी का राज्य जिनका दान है वे सर्वव्यापक और हम सबके आदि-कारण तथा कुलदेव श्रीयदुनाथ सदा विजयी हो रहे हैं।
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