मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 16
ब्रह्माण्डानि बहूनि पङ्कजभवान्प्रत्यण्डमत्यद्भुतान् गोपान्वत्सयुतानदर्शयदजं विष्णूनशेषांश्च यः । शम्भुर्यच्चरणोदकं स्वशिरसा धत्ते च मूर्तित्रयात् कृष्णो वै पृथगस्ति कोऽप्यविकृतः सच्चिन्मयो नीलिमा ॥
जिन्होंने ब्रह्माजी को अनेक ब्रह्माण्ड, प्रत्येक ब्रह्माण्ड में जुदे-जुदे अति अद्भुत ब्रह्मा, वत्सों के सहित समस्त गोपों तथा (भिन्न- भिन्न ब्रह्माण्डों के) समस्त विष्णु दिखाये; और जिनके चरणोदक को श्रीशङ्कर अपने शिर पर धारण करते हैं वे श्रीकृष्ण त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) से भिन्न कोई अविकारिणी सच्चिदानन्दमयी नीलिमा हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें