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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 14
मीनादिभिरवतारैर्निहताः सुरविद्विषो बहवः । नीतास्ते निजरूपं तत्र च मोक्षस्य का वार्ता ॥
मत्स्यादि अवतारों में भगवान्ने जिन-जिन अनेकों देव-द्रोहियों को मारा उन सभी को अपना ही रूप दे दिया, मोक्ष की तो बात ही क्या है?
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