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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 19 • श्लोक 10
निहतः पपात हरिणा हरिचरणाग्रेण कुवलयापीडः । तुङ्गोन्मत्तमतङ्गः पतङ्गवद्दीपकस्याग्रे ॥
बड़ा ऊँचा और मदोन्मत्त कुवलयापीड हाथी भगत्रान् हरि के चरण की ठोकर से मारा जाकर इस प्रकार गिरा जैसे दीपक के सामने पतङ्ग गिरता है।
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