एको भगवान्रेमे युगपद्गोपीष्वनेकासु ।
अथवा विदेहजनकश्रुतदेवभूदेवयोर्हरिर्युगपत् ॥
देखो, एक ही भगवान्ने एक साथ अनेक गोपियों के साथ रमण किया तथा विदेह जनक और श्रुतदेव ब्राह्मण दोनों के घरों में एक ही साथ आतिथ्य ग्रहण किया।
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