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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 6
साक्षाद्यथैकदेशे वर्तुलमुपलभ्यते रवेर्बिम्बम् । विश्वं प्रकाशयति तत्सर्वैः सर्वत्र दृश्यते युगपत् ॥
जिस प्रकार गोलाकार सूर्य-मण्डल साक्षात् एक देश में ही दिखायी देता है, किन्तु वह सम्पूर्ण जगत्‌ को प्रकाशित करता है और सब को एक साथ ही सब जगह दीखता भी है।
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