भगवान्ने अपना विश्वरूप दिखलाते समय अर्जुन को दिव्य-दृष्टि दी थी, इससे उन नररूप हरि की अदृश्यता सिद्ध ही है (क्योंकि चर्म-चक्षुओं से न दोख सकने के कारण ही तो उन्होंने अर्जुन को दिव्य दृष्टि दी थी)।
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