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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 4
इतरे दृश्यपदार्था लक्ष्यन्तेऽनेन चक्षुषा सर्वे । भगवाननया दृष्ट्या न लक्ष्यते ज्ञानदृग्गम्यः ॥
तो इस विषय में यह विचारना चाहिये कि इन चर्म-चक्षुओं से तो अन्य सब दृश्य-पदार्थ ही जाने जा सकते हैं, इनसे भगवान् दिखायी नहीं दे सकते; वे तो ज्ञान-दृष्टि के ही विषय हैं।
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