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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 30
तस्मान्निजनिजदयितान्कृष्णाकारान्वृजस्त्रियो वीक्ष्य । स्वपरनृपतिपत्नीनामन्तर्यामी हरिः साक्षात् ॥
अतः यह सिद्ध होता है कि व्रजबालाएँ अपने-अपने पतियों को कृष्णरूप देखकर उन्हीं को आलिङ्गन करती थीं और यह समझती थी कि यह श्रीकृष्ण ही अपने-पराये समस्त मानव पति-पत्नियों के साक्षात् अन्तर्यामी हैं।
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