काऽपि च कृष्णायन्ती कस्याश्चित्पूतनायन्त्याः ।
अपिबत्स्तनमिति साक्षाद्व्यासो नारायणः प्राह ॥
साक्षात् नारायण भगवान् व्यास ने भी कहा है कि कोई गोपी कृष्ण बनकर पूतना बनी हुई दूसरी गोपी का स्तन-पान करती थी।
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