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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 27
गच्छन्त्यस्तिष्ठन्त्यो गृहकृत्यपराश्च भुञ्जानाः । कृष्णं विनान्यविषयं समक्षमपि जातु नाविन्दन् ॥
चलते-फिरते, उठते-बैठते, घर के कामों को करते तथा भोजनादि करते हुए हर समय श्रीकृष्णचन्द्र के अतिरिक्त उन्हें सामने पड़ी हुई भी कोई वस्तु दिखायी नहीं देती थी। (उन्हें सभी पदार्थ श्रीकृष्णमय प्रतीत होते थे)
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