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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 26
सुन्दरमभिनवरूपं कृष्णं दृष्ट्वा विमोहिता गोप्यः । तमभिलषन्त्यो मनसा कामाद्विरहव्यथां प्रापुः ॥
समाधान - उन अति मनोहर, अभिनवरूप श्रीकृष्णचन्द्र को देखकर मोहित हुई गोपियाँ ही उनकी मन-ही-मन इच्छा करती थीं और (उनके न मिलने पर) कामातुरा होकर अत्यन्त विरहाकुला हो जाती थीं।
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