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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 22
नन्वुच्चावचभूतेष्वात्मा सम एव वर्ततेऽथ हरिः । दुर्योधनेऽर्जुने वा तरतमभावं कथं नु गतवान्सः ॥
शंका - आत्मा तो ऊँच-नीच सभी प्राणियों में समान है, फिर भगत्रान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन और दुर्योधन आदि में विषमभाव क्यों किया?
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