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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 21
प्रेयः पुत्राद्वित्तात्प्रेयोऽन्यस्माच्च सर्वस्मात् । अन्तरतरं यदात्मेत्युपनिषदः सत्यताभिहिता ॥
उपनिषदों ने जो कहा है कि आत्मा पुत्र से, वित्त से तथा अन्य समस्त वस्तुओं से भी प्रियतर और आन्तरिक है, उसको भगवान्ने सत्य करके दिखा दिया।
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