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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 20
गोपा वत्साश्चान्या पूर्वं कृष्णात्मका ह्यभवन् । तेनात्मनः प्रियत्वं दर्शितमेतेषु कृष्णेन ॥
ये सब ग्वालबाल और बछड़े पहले कृष्णरूप ही तो थे; इसलिये ऐसा करके श्रीकृष्णचन्द्र ने इनमें अपनी प्रियतमता को दिखा दिया।
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