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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 2
भूतेष्वन्तर्यामी ज्ञानमयः सच्चिदानन्दः । प्रकृतेः परः परात्मा यदुकुलतिलकः स एवायम् ॥
जो ज्ञानस्वरूप, सच्चिदानन्द, प्रकृति से परे परमात्मा सब भूतों में अन्तर्यामीरूप से स्थित है यह यदुकुल-भूषण श्रीकृष्ण वही तो है।
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