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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 19
गोप अपि निजबालाञ्जगृहुर्मूर्धानमाघ्राय । इत्थमलौकिकलाभस्तेषां तत्र क्षणं ववृधे ॥
गोपों ने भी अपने-अपने बालकों का सिर सूँघते हुए उन्हें उठा लिया। इस प्रकार उस समय एक क्षण के लिये वहाँ अलौकिक उत्साह की वृद्धि हुई।
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