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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 18
प्रस्रवभरेण भूयः स्रुतस्तनाः प्राप्य पूर्ववद्वत्सान् । पृथुरसनया लिहन्त्यस्तर्णकवत्यः प्रपाययन्प्रमुदा ॥
दूध के उमड़ने से उनके स्तन पुनः पुनः बहने लगे और जिनके नये बछड़ों ने जन्म ले लिया था उन्होंने भी उमङ्ग में भर-कर अपने बछड़ों को पूर्ववत् लंबी-लंबी जीभों से चाटते हुए खूब दूध पिलाया।
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