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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 16
यमुनातीरनिकुञ्जे कदाचिदपि वत्सकांश्च चारयति । कृष्णे तथार्यगोपेषु च वरगोष्ठेषु चारयत्स्वारात् ॥
एक दिन जब श्रीकृष्णचन्द्र यमुना के तट पर एक कुञ्ज में बछड़ों को चरा रहे थे और पास ही दूसरे गोष्ठ में वृद्ध गोपगण गौओं को चरा रहे थे
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