'जिस प्रकार अग्नि से छोटी-छोटी चिनगारियाँ निकलती है उसी प्रकार आत्मा से विविध प्राणियों की उत्पत्ति होती है' इस श्रुति के अर्थ को सिद्ध करने के लिये ही भगवान् ने अपने शरीर से उस जीव-समूह को रचा था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।