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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 13
नन्वात्मनः सकाशादुत्पन्ना जीवसंततिश्चेयम् । जगतः प्रियतर आत्मा तत्प्रकृते नैव संभवति ॥
शंका - आत्मा से तो इन समस्त जीवों की उत्पत्ति हुई है और संसार में सबसे अधिक प्रिय भी आत्मा ही है, किन्तु श्रीकृष्णचन्द्र में यह बात नहीं मिल सकती।
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