पारस को यदि लोहे की शलाकाओं से भेदा भी जाय तो भी उनका लोहा स्वर्ण हो जाता है, इसी प्रकार शत्रुओं को द्वेष से भी भगवान्की प्राप्ति हो जाती है।
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