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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 18 • श्लोक 1
श्रुतिभिर्महापुराणैः सगुणगुणातीतयोरैक्यम् । यत्प्रोक्तं गूढतया तदहं वक्ष्येऽतिविशदार्थम् ॥
श्रुतियों और महापुराणों ने जो सगुण और निर्गुण की एकता गूढ़भाव से कही है, उसी को मैं स्पष्ट करके बतलाता हूँ।
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