जो कल्पवृक्ष के पुष्पों की गन्ध से युक्त मन्द-मन्द वायु से सेवित है, परमानन्दस्वरूप हैं तथा जिनके चरण कमलों में श्रीगंगाजी विराजमान हैं उन महानन्ददायक महापुरुष को नमस्कार करो।
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