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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 17 • श्लोक 6
मन्दारपुष्पवासितमन्दानिलसेवितं परानन्दम् । मन्दाकिनीयुतपदं नमत महानन्ददं महापुरुषम् ॥
जो कल्पवृक्ष के पुष्पों की गन्ध से युक्त मन्द-मन्द वायु से सेवित है, परमानन्दस्वरूप हैं तथा जिनके चरण कमलों में श्रीगंगाजी विराजमान हैं उन महानन्ददायक महापुरुष को नमस्कार करो।
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