जिनका गुञ्जारवलिविभूषित मस्तक गूँजते हुए भ्रमर-समूह से सुशोभित है, किसी कुञ्ज के भीतर बैठकर ग्वालवालों के साथ भोजन करते हुए उन श्रीहरि का स्मरण करो।
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