मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 17 • श्लोक 5
गुञ्जारवालिकलितं गुञ्जापुञ्जान्विते शिरसि । भुञ्जानं सह गोपैः कुञ्जान्तरवर्तिनं हरिं स्मरत ॥
जिनका गुञ्जारवलिविभूषित मस्तक गूँजते हुए भ्रमर-समूह से सुशोभित है, किसी कुञ्ज के भीतर बैठकर ग्वालवालों के साथ भोजन करते हुए उन श्रीहरि का स्मरण करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें