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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 17 • श्लोक 2
तिष्ठन्तं घननीलं स्वतेजसा भासयन्तमिह विश्वम् । पीताम्बरपरिधानं चन्दनकर्पूरलिप्तसर्वाङ्गम् ॥
जो मेघ के समान श्यामवर्ण हैं, अपने तेज मे इस निखिल ब्रह्माण्ड को प्रकाशित कर रहे हैं, सुन्दर पीताम्बर धारण किये हुए हैं, समस्त शरीर में कर्पूरमिश्रित चन्दन का लेप लगाये हुए हैं,
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