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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 17 • श्लोक 1
यमुनातटनिकटस्थितवृन्दावनकानने महारम्ये । कल्पद्रुमतलभूमौ चरणं चरणोपरि स्थाप्य ॥
श्रीयमुनाजी के तट पर स्थित वृन्दावन के किसी महामनोहर उद्यान में जो कल्पवृक्ष के नीचे पृथिवी पर पाँव पर पाँव रखे बैठे हैं,
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