अश्लील बातों से घृणा करना, पुण्य-तीर्थ-स्थानों में जाने के लिये तत्पर रहना तथा 'भगवत्कथा- श्रवणादि के बिना यह आयु व्यर्थ ही बीत गई' ऐसी चिन्ता करना - ये सब स्थूल-भक्ति के लक्षण हैं।
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