अपने वर्णाश्रम-धर्मो का आचरण करना, नित्य भगवान् श्रीकृष्णचन्द्र की प्रतिमा का उत्साहपूर्वक विविध सामग्रियों से पूजनोत्सव करना, निरन्तर हरि-भक्तों का संग करना,
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