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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 6
स्थूला सूक्ष्मा चेति द्वेधा हरिभक्तिरुद्दिष्टा । प्रारम्भे स्थूला स्यात्सूक्ष्मा तस्याः सकाशाच्च ॥
भगवान्की भक्ति स्थूल और सूक्ष्म दो प्रकार की कही गयी है; उनमें पहले स्थूल-भक्ति होती है और फिर उसी में से सूक्ष्म भक्ति का उदय होता है।
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