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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 5
इत्युपनिषत्तयोर्वा द्वौ भक्तो भगवदुपदिष्टौ । क्लेशादक्लेशाद्वा मुक्तिः स्यादेतयोर्मध्ये ॥
और भगवान्ने भी उन दोनों रूपों के (व्यक्तोपासक तथा अव्यक्तोपासक - भेद से) दो प्रकार के भक्त बताये हैं। इनमें से एक (अव्यक्तोपासक) को क्लेश से और दूसरे (व्यक्तोपासक) को सुगमता से मुक्ति मिलती है।
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