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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 3
यद्वत्समलादर्शे सुचिरं भस्मादिना शुद्धे । प्रतिफलति वक्त्रमुच्चैः शुद्धे चित्ते तथा ज्ञानम् ॥
जिस प्रकार राख आदि से चिरकाल तक मार्जन करने से मलिन दर्पण के स्वच्छ हो जाने पर उसमें मुख का प्रतिबिम्ब स्पष्ट पड़ने लगता है उसी प्रकार शुद्ध चित्त में ज्ञान का आविर्भाव हो जाता है।
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