मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 18
जनुषु भगवद्भावं भगवति भूतानि पश्यति क्रमशः । एतादृशी दशा चेत्तदैव हरिदसवर्यः स्यात् ॥
और वह क्रमशः समस्त प्राणियों में भगवान्‌ को और भगवान्में समस्त प्राणियों को देखने लगता है, यदि ऐसी अवस्था हो जाय तो वह तत्काल भगवद्भक्तों में श्रेष्ठ हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें