और वह क्रमशः समस्त प्राणियों में भगवान् को और भगवान्में समस्त प्राणियों को देखने लगता है, यदि ऐसी अवस्था हो जाय तो वह तत्काल भगवद्भक्तों में श्रेष्ठ हो जाता है।
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