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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 15
निद्राहारविहारेष्वनादरः सङ्गराहित्यम् । वचने चानवकाशः कृष्णस्मरणेन शाश्वती शान्तिः ॥
निद्रा, आहार और विहारादि में अनादर, अनासक्त रहना, व्यर्थ वार्तालाप के लिये अवकाश न देना, श्रीकृष्ण-स्मरण से निरन्तर शान्त-चित्त रहना तथा
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