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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 13
प्रमितयदृच्छालाभे सन्तुष्टिर्दारपुत्रादौ । ममताशून्यत्वमतो निरहंकारत्वमक्रोधः ॥
इनके सिवा प्रारब्धानुकूल खल्प लाभ में सन्तोष रखना, स्त्री और पुत्र आदि में ममताशून्य होना, अहङ्कार और क्रोध से रहित होना,
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